Wednesday, November 19, 2025

पाली सीईटीपी ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक लोढ़ा सहित सचिव और कोषाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

  सीईटीपी ट्रस्ट अध्यक्ष-सचिव-कोषाध्यक्ष ने दिए इस्तीफे


तीनों ने ट्रस्ट में रखे अपने इस्तीफे, इंडस्ट्रीज में चर्चा का माहौल गर्म



सीईटीपी फाउंउेशन के एक महीने पहले अध्यक्ष चुने गए अशोक लोढ़ा, सचिव एसपी चौपड़ा और कोषाध्यक्ष प्रवीण कोठारी। जिन्होंने अब अपने इस्तीफे सौंपे।


पाली। करीब एक महीने पहले सीईटीपी फाउंडेशन के अध्यक्ष बने अशोक लोढ़ा, सचिव एसपी चौपड़ा और कोषाध्यक्ष प्रवीण कोठारी ने अपने इस्तीफे दे दिए हैं। यह खबर जब इंडस्ट्रीज में फैले तो चर्चाओं का माहौल गर्म हो गया। आखिर तीनों ने इस्तीफे क्यों दिए। इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।


वहीं, प्रारंभिक जांच में सीईटीपी फाउंडेशन के शामिल पदाधिकारियों की आपसी खींचतान इसकी वजह बताई जा रही है। जिसके चलते उन्होंने इस्तीफे सौंपे। कोषाध्यक्ष प्रवीण कोठारी ने पुष्टि की कि उन तीनों ने अपने इस्तीफे सौंपे है।


यह था मामला


बता दें कि करीब एक महीने पहले मंडिया रोड ट्रीटमेंट प्लांट संख्या एक-दो में उद्यमियों की बैठक हुई थी। जिसमें उद्यमी केतन गुलेच्छा और अनिल गुंदेचा ने इस्तीफा देते हुए एसपी चौपड़ा और अशोक लोढ़ा को सीईटीपी फाउंडेशन में शामिल करवाया था। फिर लोढ़ा का मंडिया रोड इंडस्ट्रीयल एरिया से और चौपड़ा का नाम पावर प्रोसेस एसोसिएशन से नाम भेजा गया। तब जाकर दोनों डायरेक्टर बने।


फाउंडेशन के डायरेक्टरों ने चुना था अध्यक्ष-सचिव


उसके दूसरे दिन पाली शहर के मंडिया रोड ट्रीटमेंट प्लांट संख्या एक-दो में सीईटीपी फाउंडेशन के 17 डायरेक्टर की मीटिंग हुई। जिसमें सर्व सहमति से अशोक लोढ़ा को अध्यक्ष, एसपी चौपड़ा को सचिव और प्रवीण कोठारी को कोषाध्यक्ष चुना गया था। लोढ़ा और चौपड़ा लगातार दूसरे कार्यकाल में अध्यक्ष-सचिव चुने गए थे। उद्यमियों ने उन्हें फूलमालाओं से लाद दिया था।


आपसी खेंचातान बनी इस्तीफे की वजह


इंडस्ट्रीज में चर्चा है कि लोढ़ा और चौपड़ा के फिर से अध्यक्ष-सचिव बनने से उद्यमियों का एक गुट खुश नहीं था। ऐसे में पिछले एक महीने से आपसी खींचतान चल रही थी। इस खेंचातान से परेशान होकर ही तीनों ने अपने इस्तीफे बुधवार को ट्रीटमेंट प्लांट संख्या एक-दो में रख दिए। अब देखने वाली बात होगी कि सीईटीपी फाउंडेशन को नए अध्यक्ष-सचिव मिलते है। या इन्हें मनाकर कर फिर से इन्हें ही कमान सौंपी जाएगी।

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